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19 10 2013 GYDS SHIVSANDESH OMSHANTI


Post Sat Oct 19, 2013 9:18 am

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भोला भंडारी शिव बाप आये है पवित्रता सुख शांति धन दौलत से भंडारा भरपूर करने .. भोलानाथ शिव बैठ सुष्टि के आदि मध्य अन्त का राज समझाते है अर्थात तुम बच्चों को त्रिकालदर्शी बनाते है .. भारत का ही यह हार जीत दुःख सुख का नाटक है .. भारत हीरे जैसा सालवेंट था.. भारत सुखधाम स्वर्ग हेविन था .. बाप आकर श्रेष्ठाचारी बनाते है .. परन्तु उस बाप को भी कोई मुश्किल समझ सकते है .. क्यूंकि उनको देह नही है .. सुप्रीम आत्मा बात करती है ... पावन आत्मायें होती है सतयुग में .. बाप कहते है जो जो जिस जिस भावना से पूजा करते है तो मैं उनको अल्पकाल क्षणभंगुर लिए फल दे देता हूँ ... जड़ मूर्ति कभी उनका फल नही दे सकती .. फल देने वाला , अल्पकाल का सुख देने वाला मैं ही हूँ और बेहद के सुख का दाता भी मैं ही हूँ .. मैं तो दुःख हर्ता सुख कर्ता हूँ ... तुम आये हो सुखधाम में स्वर्ग का वर्सा पाने ... इसमें परहेज बहुत है ... बाप कहते है अब सर्व का शांति, सुख दाता मैं हूँ .. तुमको सुखधाम में चलने लिए तैयार कर रहा हूँ .. यहाँ तुम बलि चढ़ते हो अर्थात जीते जी शिवबाबा का बनते हो २१ जन्म का वर्सा पाने के लिए .. यहाँ जीते जी बाप का बने, बाप की मत पर चलना पड़े, तब ही श्रेष्ठ देवता बन सकते है .. तुम अब बन रहे हो .. सुष्टि एक ही है जो पुरानी से नई बनती है .. भगवानुवाच -- यह आसुरी सम्प्रदाय का राज्य है, मैं तुमको दैवी सम्प्रदाय बनाता हूँ ... बाप कहते है मैं गरीब निवाज हूँ ... सुख का सागर, शांति का सागर .. आत्मा ज्ञान धारण कर दुर्गति से सद्गति में जाती है ... याद से सतयुग सुख का वर्सा पाना है .. आप समान वर्सा पाने लायक बनाकर पद उंच बनाना है .. हेवन्ली गोड फादर आकर सुष्टि को हेविन बनाते है अभी .. पूरा अच्छा पुरुषार्थ कर अन्धों की लाठी बनना है ... अभी तुम बच्चों को मिलते है अविनाशी ज्ञान रत्न, जीसे तुम मालामाल बन जायेंगे .. श्रीमत पर चल पद उंच श्रेष्ठ बनाना है .. अभी है कल्याणकारी युग .. यह है बहुत से बहुत १०० वर्ष का युग .. गोड एक है.. वलर्ड भी एक है .. अब बाप कहते है – बच्चे, मेरे से सदा सुख का वर्सा लो, मेरी मत पर चलकर .. सद्गति का मार्ग एक ही बाप दिखाते है .. यह है शिव शक्ति सेना ,जो भारत को स्वर्ग बनाती है ..



शनिवार – सुख का दिन – सुख सागर की सन्तान मास्टर सुख का सागर ... सर्व शक्ति सम्पन आत्मा ... सर्व को मान दे आगे बढ़ाने वाला स्वमानधारी ... श्रेष्ठाचारी देवता ..



ज्ञान :- भोलानाथ शिव भगवान बापटीचरसतगुरु, सतबाबा, सुखहर्ता सुखकर्ता, शांतिदाता सुखदाता, गरीबनिवाज, सुख का सागर, शांति का सागर, ज्ञान सागर शिवबाबा से ज्ञान को अच्छी समझकर धारण करें वाला निश्चयबुद्धि तक़दीरवान सौभाग्यशाली त्रिकालदर्शी ... पूरा पुरुषार्थी .. अच्छा पुरुषार्थी .. योग :- एक बाप की याद वाला सुखस्वरूप ... आत्मा स्टार .. बिंदी .. धारणा :- श्रीमत पर चल सब भंडारे भरपूर करने वाला सौभाग्यशाली .. श्रीमत पर तक़दीर उंच बनाने वाला तक़दीरवान .. जीते जी बाप बनकर बाप की श्रीमत पर चलने वाला सर्वश्रेष्ठ ... दैवी सम्प्रदाय का सर्वश्रेष्ठ देवता .. सेवा :- अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान कर सर्व की मनोंकामनाएं पूर्ण करें वाला शिवशक्ति .. अन्धों की लाठी ... आप समान बनाकर वर्से के लायक बनाने वाला ... भारत को स्वर्ग बनाने वाली शिवशक्ति .. ज्वालापॉइंट :- सम्पूर्ण श्रीमत वाली सर्वश्रेष्ठ ज्वाला .. शिवसन्देश :- अविनाशी ज्ञान रत्नों से मालामाल बने के लिए पूरा और अच्छा पुरुषार्थ करना है ... सबंध :- परमपिता परमात्मा मातपिता बापदादा बन्धुसखा साथीस्वामी मालिकखुदादोस्त बालकवारिस बापटीचरसतगुरु को याद प्यार नमस्ते और गुड मोर्निग गुड नाईट बाबा ... सर्व सबंध से सर्व स्मुर्तीस्वरूप ... ज्ञान योग धारणा सेवा श्रीमत बैलंस वाला समान सम्पन सम्पूर्ण फरिश्ता ... सुक्रिया बाबा सुक्रिया .. आप का अक्षोनी टाइम सुक्रिया ... मेरे बाबा प्यारे बाबा मीठे बाबा ... मैं आत्मा और मेरा बाबा ही संसार है ... दुसरा ना कोई .. मैं भी बिंदी .. बाप भी बिंदी .. ड्रामा भी बिंदी ... आत्मास्वरूप देवतास्वरूप पूज्यस्वरूप ब्राहमणस्वरूप फरिश्तास्वरूप संतुष्टस्वरूप निर्विघ्नस्वरूप सिद्धिस्वरूप प्राप्तिस्वरूप स्मुर्तीस्वरूप

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