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18 10 2013 GYDS SHIVSANDESH OMSHANTI


Post Fri Oct 18, 2013 1:46 am

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भक्तों का भगवान एक ही निराकार शिव .. यह एक ही पढाई है .. पढाई ही कमाई है .. पद का आधार पढाई पर है .. बेहद बाप का बनकर उनकी श्रीमत पर चलना है .. श्रीमत भगवानुवाच है ना ... जिससे श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ देवी देवता बनना है ... जब निश्चय हो तब शिवबाबा से मिलना है .. इश्वर का रूप निराकार है .. परमात्मा एक बिंदी है .. सदा सिमरण करना है – हम ८४ जन्म ले पार्ट बजता हूँ .. शरीर धारण करता हूँ ... जब यह सिमरन चलता रहे तब कहे पूरा त्रिकालदर्शी ... परमपिता परमात्मा इन द्वरा सभी वेंदों शास्त्रों का सार बताते है ... सुख के वर्से के लिए पढ़ना और पढाना है ... शिवशक्ति तुम गुप्त सेना हो शिवशक्तियाँ हो उनके बच्चे तुम्हारा है योगबल .. योग रखने से आत्मा पवित्र होती है ... बाप कहते है ज्ञान की शंखध्वनि करें वाले मुझे अति प्रिय लगते है ... मेरा परिचय भी ज्ञान से देंगे ... बाप कहते है तुमको वापिस चलना है ... मुझे याद करो तो विकर्म विनाश होंगे ... भगवानुवाच --- मनमनाभव ... निराकार बाबा कहते है – हे आत्मायें मुझे याद करो, मैं तुम्हारा बाप हूँ .. मुझे याद करेंगे तो अन्त मती सो गति हो जायेगी .. बाप आत्माओं को कहते है मनमनाभव .. तुम आत्माओं को हमारे पास आना है .. देहि अभिमानी होना है ... अच्छी तरह से प्रेक्टिस करनी है मैं आत्मा इस शरीर को चलाने वाली हूँ .. अब मुझे वापिस बाप के पास जाना है .. बाप कहते है चलते फिरते, उठते बैठते मुझे याद करो .. जो अशांति फैलाते है उनका पद भ्रष्ट करते है .. इस में बहुत बहुत मीठा बनना है ... याद से स्वर्ग का मालिक बनना है .. सब पॉइंट धारण कर बहुत मीठा बनना चाहिए .. ऐसे नही के कोई से दुश्मनी, कोई से दोस्ती .. देह अभिमान में आकर यहाँ ही सर्विस लेना बिलकुल रोंग है ...



शुक्रवार – पवित्रता का दिन – पवित्रता के सागर की सन्तान मास्टर पवित्रता का सागर ... बुद्धि से तीनों लोक का सैर करें वाला सहजयोगी ... एक निराकारी निश्चय का नशा की -- मैं आत्मा हूँ – बाप का बच्चा हूँ ... और साकार में सर्व सबंध के नशे वाला सहजयोगी ... श्रेष्ठ कर्म के ज्ञान से श्रेष्ठ भाग्य की लकीर खिचने वाला त्रिकालदर्शी आत्मा ... शान्त मीठा पवित्र पावन देवता ..



उंच ते उंच बड़ा बेहद का निराकार परमपिता परमात्मा, ज्ञान का सागर, नोलेजफूल, बीजरूप, रचयिता, गरीब निवाज, शिव भोला भगवान, पतित पावन, परम शिक्षक से आदि मध्य अन्त की नोलेज को सन्मुख पढ़ वर्से का हक्कदार बनने वाला बाप का रूहानी मीठा सिकिलधा सर्वश्रेष्ठ बच्चा .. ज्ञान का सिमरन वाला त्रिकालदर्शी .. पढाई पर पूरा ध्यान .. पढाई से पद .. मीठा व्यवहार वाली ज्ञानी तू आत्मा .. मास्टर ज्ञान का सागर .. अभ्यास --- मैं आत्मा इस शरीर को चला रही हूँ .. अब मुझे घर जाना है ... योग :- शिव का बच्चा, शिवशक्ति .. मीठे बाप का मीठा बच्चा .. रूहानी शक्ति वाली शिव शक्ति .. योगबल वाला यथार्त निश्चयबुद्धि .. मन्मनाभवस्वरूप .. चलते फिरते, उठते बैठते बाप की याद वाला शान्तस्वरूप आत्मा .. एक बाप की याद वाली अन्त मती सो श्रेष्ठ गीत वाला सर्वश्रेष्ठ .. इन्स्योर करें वाला देहि अभिमानी .. सर्व से समभाव वाला अति मीठा .. बहुत मीठा .. सुख के वर्से वाला .. ८४ जन्म वाला .. स्वर्ग का मालिक .. शान्त शीतल मीठा पवित्र पावन देवता ... त्रिकालदर्शी बन त्रिकालदर्शी बनाने वाला .. ज्ञान समझाने की हिम्मत .. सर्व को नीद से सुजाग करेने वाली अन्धों की लाठी .. पढ़ने और पढाने वाला .. शंखध्वनि करें वाला बाप का प्यारा और प्रिय .. सर्व को स्वर्ग का रास्ता बतलाने वाली गुप्त शक्ति सेना .. ज्वालापॉइंट :- शान्तस्वरूप मीठी पावन ज्वाला .. शिवसन्देश :- शान्त मीठा बनने के लिए ज्ञान की सर्व पॉइंट को धारण करना है .. सबंध :- परमपिता परमात्मा मातपिता बापदादा बन्धुसखा साथीस्वामी मालिकखुदादोस्त बालकवारिस बापटीचरसतगुरु को याद प्यार नमस्ते और गुड मोर्निग गुड नाईट बाबा ... सर्व सबंध से सर्व स्मुर्तीस्वरूप ... ज्ञान योग धारणा सेवा श्रीमत बैलंस वाला समान सम्पन सम्पूर्ण फरिश्ता ... सुक्रिया बाबा सुक्रिया .. आप का अक्षोनी टाइम सुक्रिया ... मेरे बाबा प्यारे बाबा मीठे बाबा ... मैं आत्मा और मेरा बाबा ही संसार है ... दुसरा ना कोई .. मैं भी बिंदी .. बाप भी बिंदी .. ड्रामा भी बिंदी ... आत्मास्वरूप देवतास्वरूप पूज्यस्वरूप ब्राहमणस्वरूप फरिश्तास्वरूप संतुष्टस्वरूप निर्विघ्नस्वरूप सिद्धिस्वरूप प्राप्तिस्वरूप स्मुर्तीस्वरूप

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