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11 10 2013 GYDS SHIVSANDESH OMSHANTI


Post Fri Oct 11, 2013 1:54 am

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11 10 2013 GYDS SHIVSANDESH OMSHANTI

बाप कहते है मैं निराकार इस शरीरी का आधार लेता हूँ .. मुझे सदैव शिव ही कहते है .. रूद्र शिव सोमनाथ .. परंतु मेरा एक ही नाम शिव है .. अभी इस भक्ति का अन्त है .. सबको वापिस ले जाने मैं आया हूँ ... यह रूद्र गीता ज्ञान यज्ञ अन्त तक चल रहेगा .. बाप कहते है मैं कालों का काल हूँ .. सबको लेने लिए आया हूँ .. तुमको सजाओं से बचाने आया हूँ .. अब मुझे याद करो, कोई भी पाप नही करो, नष्टोमोहा बनो .. कुष्ण तो ८४ जन्म ले अब आकर ब्रह्मा बना है फिर वही कुष्ण बनना है .. इसलिए इस शरीरी में ही प्रवेश किया है ..यह बना बनाया ड्रामा है .. अभी भगवान सूर्यवंशी चंद्रवंशी राजधानी स्थापन कर रहे है .. तुम्हारी भविष्य के लिए प्रालब्ध बनाते है .. अभी तुम पुरुषार्थ कर अनेक जन्मों की प्रालब्ध बना रहे हो बेहद बाप द्वरा .. ड्रामा में हर एक एक्टर का अपना अपना पार्ट है .. अब बाप समझाते है मैं तुम बच्चों को इन लक्ष्मी नारायण जैसा बना रहा हूँ माताओं द्वरा स्वर्ग के गेट खुल ने है .. वन्दे मातरम .... तुम्हारी यह रूहानी यात्रा है .. भगवानुवाच – मन्मनाभव .. मुझ अपने बाप को याद करो तो विकर्म विनाश होंगे और उड़ने के पंख मील जायेंगे ... तुम हो राजरिशी .... यह है रूद्र शिव का ज्ञान यज्ञ .. बाप कहते है तुमको मैं सतयुग शिवालय का स्वर्गवासी बनाता हूँ ..



शुक्रवार – पवित्रता का दिन – पवित्रता के सागर की सन्तान मास्टर पवित्रता का सागर .. बाप के साथ सदा क्माबाइन रहने वाला राजयोगी सहजयोगी निरंतरयोगी सो सदा सहयोगी सो उडती कला वाला सम्पूर्ण फरिश्ता स्वरूप .. कल्याण की बिंदी लगाने वाला कल्याणकारी आत्मा ... सूर्यवंशी पावन प्रिन्स ... पवित्र पावन पारस देवता ...


ज्ञान :- कालों का काल, शिव रूद्र सोमनाथ परमपिता परमात्मा रचता, पारलौकिक गोड फादर, लिबरेटर, दुःख हर्ता, सुख कर्ता, ऊँचे ते उंच ज्ञान सागर बाप, निराकार अविनाशी रूहानी बाप से राजयोग की पढाई पढ़ने वाली निराकार अजर अमर अविनाशी अशरीरी आत्मा .. परमात्मा की सन्तान .. राजयोगी राजऋषि .. वर्से के अधिकारी अविनाशी आत्मा .. ड्रामा का एक्टर आत्मा .. योग :- मैं आत्मा और मेरा शरीरी की स्मुर्तीस्वरूप .. नष्टोमोहा की श्रीमत पर चलने वाला सजा मुक्त निराकारी अशरीरी अविनाशी आत्मा .. रूहानी यात्रा का रूहानी यात्री .. एक बाप की याद वाला उड़ता पंछी .. मन्मनाभव स्वरूप .. धारणा :- नशे वाला निश्चयबुद्धि पारसबुद्धि बेपरवाह .. रावण पर विजयी .. मायाजित जगतजीत .. स्वर्ग का मालिक .. सदा सुखी .. सदा सौभाग्यशाली सतयुग स्वर्ग का पावन सूर्यवंशी देवता .. पावन प्रिन्स .. सेवा :- भारत में स्वर्ग की राजाई स्थापन करने वाला .. तन मन धन से सेवा करें वाला .. बाप की श्रीमत द्वरा सबको लिबरेट करने वाला .. स्वर्ग का द्वार खोलने वाली भारत माता ... सच्ची सेवा करें वाला रूहानी सोशल वर्कर .. ज्वालापॉइंट :- नष्टोमोहा पावन ज्वाला ... शिवसन्देश :- जितना नष्टोमोहा बनते जायेंगे उतना सजामुक्त रहेंगे ... सबंध :- परमपिता परमात्मा मातपिता बापदादा बन्धुसखा साथीस्वामी मालिकखुदादोस्त बालकवारिस बापटीचरसतगुरु को याद प्यार नमस्ते और गुड मोर्निग गुड नाईट बाबा ... सर्व सबंध से सर्व स्मुर्तीस्वरूप ... ज्ञान योग धारणा सेवा श्रीमत बैलंस वाला समान सम्पन सम्पूर्ण फरिश्ता ... सुक्रिया बाबा सुक्रिया .. आप का अक्षोनी टाइम सुक्रिया ... मेरे बाबा प्यारे बाबा मीठे बाबा ... मैं आत्मा और मेरा बाबा ही संसार है ... दुसरा ना कोई .. मैं भी बिंदी .. बाप भी बिंदी .. ड्रामा भी बिंदी ... आत्मास्वरूप देवतास्वरूप पूज्यस्वरूप ब्राहमणस्वरूप फरिश्तास्वरूप संतुष्टस्वरूप निर्विघ्नस्वरूप सिद्धिस्वरूप प्राप्तिस्वरूप स्मुर्तीस्वरूप
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